शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

जिंदाबाद....

गरीबी,भूख,शोषण,उत्पीडन,
भेदभाव,दंगे,गन्दगी,भ्रष्टाचार,
इन सबने किया भारत को लाचार
यह देश हुआ है शर्मसार

ऐ देश के गद्दारों,कायरों,भ्रष्टों,
अमीरों,इंसानियत के दुश्मनों,
सफ़ेद पोश शैतानों,
देश को कहाँ पहुंचा दिया
इसकी आबरू को सरे
बाज़ार नीलाम करा दिया
फिर भी कलेजा नहीं भरा,
जो इसे चीड खाने पर उतारू हो
तुम सब दिलो-दिमाग से बीमारू हो
ये मत पूँछ तेरे लिए हमारे
अन्दर कितनी नफरत है
न तू कभी समझ सकेगा,
न हम कभी बता पायेंगे

आखिर कितनी दूर है विकास की परछाई
कितनी गहरी है गरीबी की खाई
जो इन साठ सालों में न पट पायी
ऐ भगत,आज़ाद के लाडलों,
देश के चारागों....
अब तो खामोशी तोड़ो,
मुट्टी बंद कर जिंदाबाद बोलो
देश को सच्ची आज़ादी की तरफ मोड़ो

जिंदाबाद....

रविवार, 1 अगस्त 2010

कुछ अनचाहे प्रश्न

कुछ अनचाहे प्रश्न जो
अक्सर मुझे झकझोरते हैं
हैरां-परेशाँ करते हैं...

इन्सान इंसानियत से दूर क्यूँ
हैवान बनकर करता बड़ी भूल क्यूँ
मंदिर-मस्जिद बने कमाई के अड्डे क्यूँ
चारों ओर लगे शराब के भट्ठे क्यूँ
ठाकरे-मोदी जैसे चेहरे हो रहे आम क्यूँ
सांप्रदायिक दंगे हो रहे दिन रात क्यूँ
गौतम-गाँधी का मिट रहा नाम क्यूँ

क्यूँ हो रही घाटी बेचैन है
दंतेवाडा के किसी घर में नहीं चैन है
फौजियों के शोषण पर नहीं
कोई लगाम क्यूँ
सरकार इसपर है चुपचाप क्यूँ

क्यूँ जज्ज को "मेलोर्ड" कहना पड़ता है
पुलिस से हमेशा डरना पड़ता है
क्यूँ कोई बिना कुछ किये ही
सालों जेल में सड़ता है
और कई बहुत कुछ करके भी
मजे से जीवन में उड़ता है

क्यूँ बाहर से अनाज आयात हो रहा
जब देश में ही अनाज है सड़ रहा
क्यूँ महंगाई है सर पर नाच रही
अमीरों को क्या फिक्र उनपर तो
थोड़ी सी भी है आंच नहीं
क्यूँ लक्ष्मी,लक्ष्मी के पास जाती हैं
गरीब को गरीबी में सताती हैं

किसान बेचता आलू
पांच रुपये किलो
हल्दीराम कमाता उसी
एक किलो से पांच सौ क्यूँ
क्यूँ किसान आत्महत्या
करने को मजबूर है
क्या उसका नहीं कोई वजूद है

आज भी बच्चा भूख से है मर रहा
तो ये कॉम्मन वेल्थ है क्यूँ हो रहा
पानी की तरह आम जन का
ये वेल्थ क्यूँ बहाया जा रहा
समझ नहीं आता ये
खेल क्यूँ कराया जा रहा

क्यूँ शिक्षा महँगी हो रही, हमें
सौगात में रिक्शा ही मिल रही
क्यूँ आमिर का बच्चा ही
डी.पि.अस,सी.ऍम.अस में पढ़ रहा
हमें क्यूँ नहीं ये हक मिल रहा

कोई माँ अपना बच्चा
बेचने पर मजबूर क्यूँ
चंद पैसों के लिए कोई
महिला शारीर बेचे है क्यूँ
ईंट-भट्ठे पर बच्चों का
जीवन होता नीलम क्यूँ
साठ साल से देश
खामोश हो, सो रहा क्यूँ

क्यूँ मंत्री के बच्चे,
बिना कुछ किये ही
मंत्री बन जाते हैं
और मेहनतकश,समाज
से जुड़ा हुआ
संत्री भी नहीं बन पाता है
कैसे एक नेता पांच साल में
करोड़-पति बन जाता है
क्या वो कभी लौटकर
जनता के बीच भी जाता है
संसद में ये सब सुनाई
देता नहीं क्यूँ

क्यूँ तस्लीमा छुप कर
जीने को मजबूर है
और जिनको छुप कर
जीना चाहिए वो सीना ताने,
अपने आप में मगरूर हैं
क्यूँ देश का पैसा स्विस बैंक
में कोई दबाये बैठा है
हवाला के जरिये करोड़ों का
बाजार फैलाए बैठा है

ऐश्वर्या ने कौन सी साड़ी पहनी
यह पहले पन्ने पर छपती है
कोई मजदूर अपने हक के लिए
महीनो से धरने पर बैठा है
यह खबर क्यूँ नहीं बनती है

घर-घर मोबाइल है पहुँच रहा हुजूर
पर महिलाएं आज भी खुले में
जाने को हैं क्यूँ मजबूर
इसका कोई उत्तर देता क्यूँ नहीं

क्यूँ किसी माँ के छाती में
दूध उतरता नहीं
क्यूँ किसी आमिर का
पेट कभी सिकुड़ता नहीं
क्यूँ कोई अपने जन्दीन पर
लाखों खर्च कर देता है
और क्यूँ लाखों को अपना
जन्मदिन भी नहीं ज्ञात होता

हमारी आबादी है एक अरब,फिर
अदब के इंसान सिर्फ मुट्ठीभर,क्यूँ
कुछ अनचाहे प्रश्न जो अक्सर मुझे
झकझोरते हैं
हैरां-परेशाँ करते हैं...