बुधवार, 24 अप्रैल 2013

देखो मजदूर पाले जा रहे



पी.एम.वी.* की टीचर स्कूल छोड़ घर भागी
अपने बच्चे के प्रति उनकी जिम्मेदारी जागी II

उन्हें याद हुआ की उनके बच्चे का कल इम्तेहान है,
भूल गईं की कल, पी.एम.वी. के बच्चों का भी तो इम्तिहान है II

सी.एम.एस** का इम्तेहान तो पी.एम.वी. पर भारी पड़ता ही है 
और सरकारी तंत्र बखूबी इस अंतर को बनाए रखता ही है II

सड़ते मरते स्कूलों में देखो मजदूर पाले  जा रहे, और
देश चलाने को खैर, सी.एम.एस में बाबू तैयार किये जा रहे II

* पूर्व माध्यमिक विद्यालय
**सी.एम.एस- सिटी मोंटेसरी स्कूल 


बुधवार, 17 अप्रैल 2013

लतीफों को तू सच बना



तेरे इंतकाम की घड़ी करीब आ गई 
तेरे इंतेहा की शब् कल कहीं गुज़र गई 

तू बेहिचक तू बेझिझक दमन का काल बन के देख,
तू ही आजाद तू ही भगत, तू इन्कलाब तो कह के देख 

तेरे शौर्य के समां नहीं कोई प्रताप है 
तू आग है, तू बाघ है, तू जीत की मिसाल है 

इरादे तेरे नेक हैं तू चाहता बस न्याय है 
पर चाहना क्या काफी है, ख्वाब देखना नाकाफी है 

सतरंज की बिसात ये, तो चल रहे युगों से है 
तू चाल कोई चल दिखा, दे मात इनको कर दिखा 

तू कर प्रलय तू बन कहर, तू मौत को चल मौत दे 
अब जुल्म को तबाह कर, बेड़ियों को तोड़ दे 

अमीरों के मुहल्लों में तू अब कोई हाहाकार कर 
लतीफों को तू सच बना, गरीबी को कुचल दिखा 

रविवार, 7 अप्रैल 2013

डॉक्टर - तेरे पेशे में अब राज कई


तेरी इबादत सब कोई करता
काम नेक तू बड़ा है करता
तू कुशल बड़ा, तू ज्ञानी बड़ा
हम सबकी जान बचाता तू

आशा का दूजा नाम तु ही
तुझ पर कईयों की आस बड़ी
इश्वर सी तुझमे आस्था है
जीवन दाता कहलाता तू 

तू जादूगर, तू मायावी
तू चमत्कार करता बड़े
तू आज का नया वैज्ञानिक है
तू धर्म जात से है परे

लेकिन हो रहा सब उलट पुलट
बीमार, निरुपाय सा दिखता है
की क्यूँ तू यहाँ से पढ़ लिखकर
विदेश में जाकर चमकता है

आदर्शों का पुल कैसे तू
तोड़ कदम बढाता है
गाँव न तुझको अनुपम लगता, न ही
कस्बों में इलाज करना सुहाता है

अपने ही करतूतों से, तूने
दामन अपना रंगीन किया
पैसे के खातिर ऐ जालिम
कईयों को ग़मगीन किया  

आसुओं और चीत्कारों का
तू मोल न अब समझता है
तू मोल-तौल और कागज़ में
बस डूबा-डूबा सा रहता है

दौलत के आगे तूने भी
देख घुटने टेक दिए
दवा देने वाले हाथों ने
देख कितने खून किये

तूने कितने ही बचपन मारे
कितने ही रैकेट चलवाए
तूने ही तो अमीरों के लिए
गरीबों के अंग बिकवाये

तेरे चौखट पर कितनो के
दम यूँ ही निकल जाया करते
तू कैसा रे जीवन दाता
जीवन का मोल न समझता तू

तुझ पर घोटालों के गाज कई
तेरे पेशे में अब राज कई
इलाज तो तूने महंगा किया
गरीबों का जीवन गिरवी किया

मानवता को तू भूल रहा
अब तू मशरूफ कमाने में
तेरी इज्ज़त है खतरे में
तेरा पेशा अब अधरों में