शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

बंजर भूमि का क्या होगा

आज बताता हूँ एक राज की बात 
कैसे कोई बनता है सेठ साहूकार 

कुछ पैसे फ़ेंक, और पैसे बना 
कुछ साजिश कर, और गुलाम बना

गरीबी की मिट्टी में अब चल
अमीरी का तू एक पेड़ लगा 

खुद मालिक बन, ऐयाशी कर 
मेहनत को चल, तू बेवा बना

कुछ दान धरम का ढोंग दिखा 
इज्जत भी कमा, शोहरत भो कमा  

मिट्टी तो तुझको सब कुछ देगा 
पर तू तो मिट्टी को ही डंस लेगा 

तू लूटेगा और लुटायेगा, फिर भी 
हर सूरत में, अमीर ही कहलायेगा

बंजर भूमि का क्या होगा, उससे तूने
सब कुछ छीना, उसका तूने सब कुछ लूटा 





आदमी गुलाम है

गरीबों की बस्ती में 
आग  लगी  मस्ती में 
पसीने से लथपथ सब 
जल रहा धक्-धक् घर 
पेट देखो खाली है 
दिवाला की यहाँ दिवाली है 
यह दुनिया निराली है 

भूख है, यहाँ प्यास है 
यम का यहाँ वास है 
इलाज है अस्पताल है 
बिजली औ पानी का बुरा हाल है
शिक्षा का यहाँ अकाल है 
सब अमीरों की देन ये 
फिर भी अमीरों से आस है 


आदमी गुलाम है, आदमी बेहाल है