सोमवार, 19 मई 2014

शाह चला शिकार पर

किया ऐलान ललकार कर
बादशाह निकला शिकार पर
शाही गज पर सवार हो
चला बड़ी ताव  से वो
शाह चला शिकार पर

शाही जंगल में पड़ा पड़ाव
ढोल बजे, नगाड़े बजे,
प्रजा डरी उत्साहित सी
शाह का पूरा साथ दिया
शाह चला शिकार पर

रोज नगाड़ा बजता रहा
शाह कई जाल बुनता गया
सैनिक यहाँ-वहाँ फैलाये गए
चारा यहाँ-वहाँ बिखराया गया
शाह चला शिकार पर

शाह कूच करता रहा
घेरा घना होता गया
शिकार, हाय! फँसता गया
शाह की भौहें खिलती गयीं
शिकार की आस बढ़ती गयी
शाह चला शिकार पर

चारों ओर से घिरा हुआ
बब्बर ना, अब वो डरा हुआ
शाह के जाल में फँस ही गया
उफ्फ! शिकार वो बन ही गया
शाह चला शिकार पर

शाह का डंका खूब बजा
शिकार शाह औ मुसाहिबों का हुआ
प्रजा को हासिल कुछ हुआ
प्रजा ने मिलकर तय ये किया
अब अगली बार साथ नहीं देंगे, पर
फिर, शाह चला शिकार पर


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